सरकार के मजबूत प्रचारतंत्र के द्वारा हर बार लफ्फाजियों से भारत की मासूम जनता को गुमराह करना, फालतू और बेबुनियादी प्रोपेगेंडों को मुद्दा बनाकर जनता को उनके रोजमर्रा की मुलभुत जरूरतों से उन्हें खुद हीं दरकिनार करवाना, कब तक होगा ? अपने छद्म तर्क-कुतर्कों से देश के सबसे जागरूक और शिक्षित, कुशल युवा वर्ग को गलत ठहरा कर उन्हें पाई-पाई का मोहताज बनाना सरकार को मंहगा पडेगा। हम सभी देशवासियों को ज्ञात होना चाहिए कि संसद के स्थाई समितियों में भी सार्वजनिक उपक्रम का विशेष समिति होने का जिक्र है, जो देश की आत्मनिर्भरता के लिए जवाबदेह हैं, देश की आर्थिक सशक्तता के लिए जिम्मेदार है। उसके बावजूद भी जनता को निजीकरण के लिए आकर्षित और प्रेरित किया जा रहा है। हमारे सरकार के आई टी सेल और खरीदी हुई गोदी मीडिया द्वारा निजीकरण का समर्थन करवा कर देश को बर्बाद और गुलामी के दलदल में ढकेला जा रहा है। वो सार्वजनिक उपक्रम/संस्थान जो कल तक निहायत हीं किफायती और उच्च कोटि की सेवा देने के लिए प्रख्यात थी। जिसका मकसद सिर्फ जनता की सेवा करना था, ना कि सिर्फ लाभ अर्जित करना। इनके निजीकरण से जहाँ एक ओर प्रत्यक्ष व पारदर्शी रोजगार के अवसर शुन्य होते जाएंगे, वहीं दूसरी तरफ निजीकरण से इन चंद संस्थान द्वारा दी जा रही सेवा की गुणवत्ता में भी भारी कमी आएगी और एक दिन निजीकरण से ये संस्थान भारत की गरीब और कमजोर जनता के लिए लुट का अड्डा बन जाएगी। जैसा कि आप देख रहे हैं सरकारी कार्यालयों के हरेक क्षेत्रों में, हरेक वर्ष में लगातार कम होते रोजगार के अवसर, आवेदन के 2 साल बाद भी परीक्षाओं का नहीं होना, परीक्षा के बाद परिणाम का महीनों इंतजार करना और ज्वाइनिंग के लिए वर्षों इंतजार करना, बेरोजगार युवाओं के लिए ये जख्म नहीं नासुर है। आप उन गरीब युवाओं के बारे में भी जरा कल्पना किजीए जो तमाम आर्थिक तंगी को झेलते हुए, अभुतपूर्व ज्ञान को अर्जित करते हुए, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कठिन संघर्ष करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर अच्छे दिनों की आस में बांट जोह रहे हैं। उसके साथ में वो देश में व्याप्त कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार का शिकार होकर लगातार मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उन पर क्या बीतती होगी। क्या इतनी बड़ी सक्षम और सामर्थ्य युवा शक्ति को सही मार्गदर्शन और रोजगार नहीं मिल पाना हमारे देश के लिए गर्व की बात है, शान की बात है ? सबसे बड़ी विफलता है अपने देश की युवा शक्ति का नजर अंदाज करना, जिनके रगों में कुछ भी कर गुजरने का अदम्य साहस होता है। जो लोग सिस्टम में जाकर नए जोश- नए उर्जा से देश का कायाकल्प कर सकें वैसे युवाओं का मौका छिनना बेहद ही निंदनीय कार्य है जिसके लिए दोषी सिर्फ आज की वर्तमान सरकार हीं है जिसने युवा शक्ति को लगातार छलने का काम किया है। ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी भी देश का विकास हो और उसमें रोजगार के अवसर सृजित न हो। ये सरासर छलावा है, इस धोखे को अब और सहा नहीं जा सकता है। जिन युवाओं ने वर्तमान सरकार को फर्श से अर्श पर पहुँचाया था वो उन्हें वापस अर्श से फर्श पर ला देंगे। अभी भी वक्त है होश में आए सरकार , वरना युवा भारत को, आपको आपके औकात तक पहुँचाते देर नहीं लगेगी।
#Rashtriya Berojgar Diwas,
निशु कुमार सिंह
समसामयिक रणनीतिकार
युवा जनक्रांति मोर्चा

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें