सब कहते है बचपना है हममे but, जब सोचती हु तो ....लगता है, यह बचपना भी मेरा कितना अनोखा है, बचपन की तरह फुदक फुदक अपने ऐहसासो को खुद मे दबा लेना, एक मुशकुराहट से गम को छीपा लेना .........🤗
थोरी सी नासमझ हु..🤔...अपने अन्दाज में बेमिशाल हु, हर बिगरा काम् को शुलझा लेना .....कितना प्यारा है ये मेरा बचपना, दुनिया की समझदारी समझ नही आती ...
लोगो का दिल दुखाना नही आता,❤️ नाही आती है लोगो के बिच बैठ गप्पे लगाना ...आती है तो सिर्फ लोगो से सरारत करनी ...खुद मे सान्त बैठ जाऊ अपनी मनं की सरारत को जरा सुनलु ...
दोस्त कहती है की तु नादान नासमझ है, हाँ हु मैं नासमझ लोगो के समझदाती भरे फरेब जो हमे समझ नहीं आते...आती है तो सिर्फ वफ़ा ...माँ कहती है की तुमहार क्या होगा कब तुम समझे गी कैसे रहे गी इस दुनिया मे,कब खुद को संभाले गी ...
ना समझना हमे ये दुनिया को बस इस नासमझ को कोई समझदार मिल जाये.... ...to be continue😊😊
................मेरे कुछ ल्फज
सही कोशिश, अगला भाग लिखिए
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