आज जब देश में चारों ओर एक अनिश्चितता और अनचाहा खौफ छाया हुआ है, वही दूसरी तरफ बीमारी और बेकारी से हाहाकार करती लगभग दो तिहाई जनता,संपुर्ण देश की चौपट अर्थव्यवस्था से घोर गरीबी का दिखता संकट के बीच राममंदिर का शिलान्यास करवाना कोई धार्मिक मार्यदा का परिचायक न होकर, वो एकमात्र राजनीतिक षड्यंत्र है जो इस देश के शासक को 2024 वाले लोकसभा चुनाव को अतिरिक्त बल देता है। जब 2023-24 में ये मंदिर बन जाएगी तब इसके उद्धाटन समारोह को सरकार के पालतु मीडिया द्वारा बतौर ग्रैंड इवेंट के तौर पर पेश किया जाएगा और मोदी जी पुनः वोट भी राम मंदिर के नाम पर हीं मांगेंगे और हम आप अपनी धार्मिक आस्था से ओतप्रोत होकर पुनः लफ्फाजी महापुरुष को अपना कीमती वोट दे चुके होंगे। आप घबराईए मत आप सभी के अनुसार अगली बार फिर से मोदी सरकार होगी तो ये भी जान लें तब तक देश पुरी तरह से पुंजिपतियो के हाथ में बिक चुका होगा, लोगों के उनके प्रतिभा के अनुकूल न तो रोजगार होगा, और काम - धंधा, सारे सरकारी संस्थान, नौकरी पेशा नीजिकरण के जरिये पैसा-पाॅवर की भेट चढ चुके होंगे पुंजिपतियों - अमीरों के चरण मे और न आपके पास कोई समाजिक समानता होगा, न कोई बराबरी का अधिकार क्योंकि तब तक हमारा समाज छद्म हिन्दुत्ववाद की जहरीली आग से सब कुछ निगल कर पुनः ब्राह्मणवाद और मनुवाद को स्थापित कर चुका होगा। अब भी वक्त है आप आंखों को खोलिए और पहले खुद से हीं पुछिए कि धार्मिक आस्था के अलावा क्या दिया है इस सरकार ने, लॉकडाउन में जो भयानक दृश्य देखने को मिला वो क्या बद से बदतर नहीं था ? क्या अब बला टल चुकी है ? आगे की क्या रणनीति है इस हवाबाज सरकार के पास ? आपके बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर क्या सोच रखा है इस सरकार ने? अयोध्या, काशी, मथुरा छोडिये मैं चाहता हूँ हर गली मोहल्ले में प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण का मंदिर बन जाए। तो इससे क्या हमारा आने वाले कल सुखी - सम्पन्न हो जाएगा, आपने कैसा भविष्य सोच रखा है अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए ... सोचिए और बताइये ?
- निशु कुमार सिंह
समसामयिक रणनीतिकार
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